शनिवार, 28 फ़रवरी 2015

"दीवारें"

कभी कहीं पढा था दीवारें  मौन होती हैं.बचपन से आज तक  सुनती आयी हूँ दीवारों के कान होते हैं.मेरा मन दीवारों के बारे मे कुछ और ही सोचता है.

लोग कहते हैं दीवारों के कानहोते हैं . हाँ सच है दीवारों के भी कान होते हैं मगर ,
जब दीवारें बोलती हैं तो हर तरफ खामोशी की चादर पसरी होती है,
केवल आपके अन्तर्मन की आवाज बोलती है,
दीवारें तब बोलती है जब एकाकीपन आपके साथ होता है,
दीवारों का बोलना आपके अन्तर्मन की आवाज होती है,
बडी शर्मिली होती है दीवारें, खामोशी में बात करती हैं
इनके केवल कान नही होते;जुबान भी होती है.